Research Studies

प्रकाशन तिथि: जनवरी 1990

इस अध्‍ययन का केन्‍द्र बिन्‍दु शहरी क्षेत्रों में गरीबी में कमी लाने में महिलाओं की भूमिका है, जिस पर तीन विशिष्‍ट भागों में ध्‍यान दिया गया है। पहले भाग में शहरी क्षेत्रों की महिलाओं की वृहत्‍त दृष्टि से जांच की गई है और यह लिंग अनुपात, महिला भागीदारी दर, महिलाओं द्वारा किए जाने वाले कार्यकलापों की प्रकृति और पारिवारिक आय, रोजगार में महिलाओं की हिस्‍सेदारी तथा योगदान आदि जैसे संकेतकों के संबंध में डाटा प्रस्‍तुत किया गया है। दूसरे भाग में उस पूरे ढांचे का सिंहावलोकन प्रस्‍तुत किया गया है जिसके भीतर विगत चार दशकों के दौरान महिलाओं तथा शहरी गरीबी के संबंध में नीतियां...

प्रकाशन तिथि: जुलाई 1988

यह अनुसंधानात्‍मक अध्‍ययन पूर्वोत्‍तर क्षेत्र में शहरीकरण की प्रक्रिया की जांच करता है तथा वृद्धि को संचालित करने तथा शहरीकरण की प्रक्रिया का मार्गदर्शन करने हेतु उपायों की पहचान करता है ताकि क्षेत्र में पड़ने वाले राज्‍यों में सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन लाया जा सके। अध्‍ययन के अंतर्गत कुछ पहलुओं में क्षेत्रफल तथा जनसंख्‍या, निवल शेयर घरेलू उत्‍पाद का ढांचा, जिलावार आबादी का ग्रामीण-शहरी आबंटन, शहरी जनसंख्‍या घनत्‍व, शहरी परिवारों का औसतन आकार, कस्‍बेवार पुरूषों तथा महिलाओं की जनसंख्‍या और लिंग अनुपात, शहरी साक्षरता, कृषकों की प्रतिशतता, जनजातीय जनसंख्‍या की स्थिति,...

प्रकाशन तिथि: जनवरी 1989

यह अध्‍ययन तिनसुकिया (असम), छांगानाचेरी (केरल), बालासोर तथा संभलपुर (ओडिशा) के चार शहरों में एकीकृत छोटे तथा मध्‍यम शहरों का विकास (आईडीएसएमटी) कार्यक्रम के भाग के रूप में किए गए विभिन्‍न कार्यकलापों के निष्‍पादन एवं प्रभाव का विश्‍लेषण करता है और उन गतिरोधों की पहचान करता है जिनसे कार्यक्रम का कार्यान्‍वयन बाधित होता है। अध्‍ययन के परिणाम अनेक पहलुओं को व्‍यक्‍त करते हैं। दूसरा, यह अध्‍ययन कार्यक्रम की आयोजना तथा कार्यान्‍वयन में म्‍यूनिसिपल निकायों की प्रभावी भागीदारी की अनुपस्थिति को दर्शाता है और तीसरा विभिन्‍न आईडीएसएमटी कार्यकलापों के लिए भूमि-अधिग्रहण से जुड़ी...

प्रकाशन तिथि: मार्च 1989

बड़े महानगरीय क्षेत्रों में रेंटल हाउसिंग एक मुख्‍य विशेषता है। ये क्षेत्र बड़ी संख्‍या में प्रवासियों, युवाओं तथा चलायमान आबादी द्वारा अभिलक्षित होते हैं। ये समूह शहरी क्षेत्र में रेंटल हाउसिंग की विविध प्रकार की मांग सृजित करते हैं। इस लेख में मांग और आपूर्ति को संचालित करने वाली ताकतों को समझने का प्रयास किया गया है क्‍योंकि वे रेंटल मार्किट पर प्रभाव डालती हैं। रेंटल मार्किट की मांग को अवधि के चयन के प्रश्‍न के रूप में देखा जाता है। अवधि के चयन के प्रश्‍न का निर्णय घरेलू स्‍तर पर लिया जाता है और यह विविध आर्थिक तथा गैर-आर्थिक पहलुओं द्वारा प्रभावित होता है। इस अध्‍...

प्रकाशन तिथि: सितंबर 2008

इस अध्‍याय में सर्वोत्‍तम परिपाटियों के आधार पर सुधार के मुख्‍य क्षेत्रों की पहचान की गई है तथा ये पहले से किए गए ऐसे सुधारों से सबक लेने हेतु दिशानिर्देशों का प्रस्‍ताव रखते है जिन्‍हें भारत में संपत्ति के पंजीकरण तथा लाइसेंसिंग प्रक्रियाओं को सहज बनाने हेतु अपनाया जा सकता है। ये दिशानिर्देश विभिन्‍न देशों तथा शहरों में पहले से ही किए गए सर्वोत्‍तम सुधारों/प्रैक्टिसों पर आधारित हैं। इनमें दिल्‍ली, लुधियाना, इंदौर, लखनऊ, कोलकाता, रांची, मुम्‍बई, सूरत, बेंगलुरू तथा त्रिवेन्‍द्रम शामिल हैं।

इन अध्‍ययनों में यह उजागर किया गया है कि बेंगलुरू, दिल्‍...

प्रकाशन तिथि: मार्च 1989

बड़े शहरी क्षेत्र में रेंटल हाउसिंग मार्किट के ढांचे तथा काम-काज को समझने के लिए दिल्‍ली का केस अध्‍ययन लिया गया था। दिल्‍ली एक बड़ा रेंटल हाउसिंग बाजार है जो वर्ष 1981 से 545136 परिवारों को ऐसे घर प्रदान कर रहा है। निजी (रिहायशी) क्षेत्र शहर में रेंटल हाउसिंग का अग्रणी आपूर्तिकर्ता है जिसमें दिल्‍ली के सभी क्षेत्र तथा सभी प्रकार के घर शामिल हैं। बहुतायत रेंटिंग घर के कुछ हिस्‍से को रेंट पर देने के रूप में है। 1980-88 की अवधि के दौरान दिल्‍ली में निजी क्षेत्र के रेंटल हाउसिंग बाजार (आरएचएम) में सभी प्रकार के घरों के किराए में वृद्धि हुई है। इस अध्‍ययन में आम जनता को...

प्रकाशन तिथि: जनवरी 1988

हाल ही के वर्षों में परम्‍परागत आवास की तुलना में वृद्धिशील आवास के संदर्भ में निम्‍न आय वाली शहरी आबादी को सुविधाजनक बनाने के लिए सर्वाधिक व्‍यापक रूप से प्रयोज्‍य साधनों में से एक 'स्‍थल एवं सेवा' (एस/एस) परियोजना रही है। भारत में भी इन परियोजनाओं की सभी प्रकार के शहरों में बड़े पैमाने पर प्रतिकृति की गई है। अतः मौजूदा अध्‍ययन की प्रवृत्ति वित्‍तपोषण, उत्‍पादन, कार्यान्‍वयन तथा अवशोषण प्रक्रियाओं में मुख्‍य गतिरोधों की जांच करना है ताकि यह सुझाव दिया जा सके कि इस एस/एस दृष्टिकोण को आश्रय तथा अवसंरचना एवं शहरी सामुदायिक विकास की सुलभता में उन्‍नयनों के व्‍यापक संदर्भ...

प्रकाशन तिथि: मार्च 1989

रेंटल हाउसिंग मुख्‍यतया एक शहरी कार्यकलाप है। शहरी क्षेत्रों में किराए के मकानों में रहने वाले परिवारों की संख्‍या ग्रामीण क्षेत्रों से कही ज्‍यादा है। इसके अतिरिक्‍त किराए के मकानों की प्रतिशतता छोटे-छोटे आकार के शहरों की तुलना में बड़े शहरों में कहीं ज्‍यादा है। वर्ष 1961-1981 के दौरान I श्रेणी के अधिकतर शहरों में रेंटल हाउसिंग की स्थिति की एकमात्र सर्वाधिक आम विशेषता रेंटल हाउसिंग में रहने वाले परिवारों की प्रतिशतता में गिरावट आना है। श्रेणी I के कुल 140 शहरों, जिनके संबंध में वर्ष 1961, 1971 तथा 1981 के लिए रेंटल हाउसिंग में रहने वाले परिवारों की प्रतिशतता संबंधी...

प्रकाशन तिथि: जनवरी 1998

शहरी भारत परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। आर्थिक सुधारों, उदारीकरण तथा वैश्‍वीकरण के युग में शहर तथा कस्‍बे घरेलू एवं अंतर्राष्‍ट्रीय निवेशों के केन्‍द्रों के रूप में उभर रहे हैं। इसका कारण मुख्‍यतया संकुलन की उनकी विशेषताएं तथा निवेश की अर्थव्‍यवस्‍थाएं हैं। ये शहर औद्योगिक तथा वाणिज्यिक कार्यकलापों के केन्‍द्र एवं सरकार के शासन क्षेत्र रहें हैं। इसके अतिरिक्‍त, शहरी स्‍थानों पर आधुनिक शैक्षणिक, स्‍वास्थ्य तथा पर्यावरण संबंधी सुविधाएं नितांत प्रचुर मात्रा में उपलब्‍ध हैं। क्षमता के भंडार होने के नाते वे विविध विशिष्‍ट सेवाएं प्रस्‍तुत करती हैं जिनमें विधिक, वित्‍तीय,...

प्रकाशन तिथि: फरवरी 1994

भारत में शहरीकरण दो विपरीत विशेषताओं से अभिलक्षित होता है – आर्थिक कार्यकलापों में वृद्धि तथा जीवन की गुणवत्‍ता में गिरावट। शहरी क्षेत्रों में जीवन की गिरती हुई गुणवत्‍ता संबंधी कारणों में से एक कारण बढ़ती मांगों को पूरा करने के लिए अवसंरचना तथा सेवाओं के प्रावधान के प्रबंधन एवं संवर्धन में शहर की सरकारों की अक्षमता है। अब यह माना जा रहा है कि शहरी सेवा प्रदानगी ऐसी समस्‍या नहीं है जिसका समाधान केवल स्‍थानीय निकायों को अतिरिक्‍त वित्‍तीय संसाधन प्रदान करके ही किया जा सकता है। हाल ही में अवसंरचना, सेवाओं तथा आश्रय की शहरी सेवा प्रदानगी के संवर्धन एवं प्रबंधन के लिए...

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