महिलाएं, शहरी गरीबी तथा आर्थिक विकास

Submitted by niuaadmin on 12 जनवरी 2016 - 4:31pm
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इस अध्‍ययन का केन्‍द्र बिन्‍दु शहरी क्षेत्रों में गरीबी में कमी लाने में महिलाओं की भूमिका है, जिस पर तीन विशिष्‍ट भागों में ध्‍यान दिया गया है। पहले भाग में शहरी क्षेत्रों की महिलाओं की वृहत्‍त दृष्टि से जांच की गई है और यह लिंग अनुपात, महिला भागीदारी दर, महिलाओं द्वारा किए जाने वाले कार्यकलापों की प्रकृति और पारिवारिक आय, रोजगार में महिलाओं की हिस्‍सेदारी तथा योगदान आदि जैसे संकेतकों के संबंध में डाटा प्रस्‍तुत किया गया है। दूसरे भाग में उस पूरे ढांचे का सिंहावलोकन प्रस्‍तुत किया गया है जिसके भीतर विगत चार दशकों के दौरान महिलाओं तथा शहरी गरीबी के संबंध में नीतियां तैयार की गई है तथा यह उन कार्यक्रमों की प्रकृति का भी वर्णन करता है। जिन्‍हें महिलाओं के विकास तथा गरीबी हटाने के लिए शुरू किया गया है। तीसरा भाग फरीदाबाद शहर में अल्‍प-आय परिवारों के केस अध्‍ययन सर्वेक्षण का विश्‍लेषण किया गया है जिन पर इस बात पर फोकस किया गया है कि गरीबी में कमी लाने के लिए महिलाएं क्‍या करती हैं। कुल मिलाकर यह तर्क इस बात पर जोर देता है कि अल्‍प आय के परिवारों में महिलाएं जो भी करती है वह संपूर्ण आर्थिक तथा सामाजिक विकास के संदर्भ में बामुश्किल पर्याप्‍त होता है तथा उनके समक्ष शहरी गरीबी से प्रभावी तरीके से निपटने में अनेक बाधाएं मौजूद होती हैं।