भारत के द्वितीयक शहरों में स्‍थल तथा सेवा परियोजनाएं: एक मूल्‍यांकन अध्‍ययन

Submitted by niuaadmin on 12 जनवरी 2016 - 4:41pm

हाल ही के वर्षों में परम्‍परागत आवास की तुलना में वृद्धिशील आवास के संदर्भ में निम्‍न आय वाली शहरी आबादी को सुविधाजनक बनाने के लिए सर्वाधिक व्‍यापक रूप से प्रयोज्‍य साधनों में से एक 'स्‍थल एवं सेवा' (एस/एस) परियोजना रही है। भारत में भी इन परियोजनाओं की सभी प्रकार के शहरों में बड़े पैमाने पर प्रतिकृति की गई है। अतः मौजूदा अध्‍ययन की प्रवृत्ति वित्‍तपोषण, उत्‍पादन, कार्यान्‍वयन तथा अवशोषण प्रक्रियाओं में मुख्‍य गतिरोधों की जांच करना है ताकि यह सुझाव दिया जा सके कि इस एस/एस दृष्टिकोण को आश्रय तथा अवसंरचना एवं शहरी सामुदायिक विकास की सुलभता में उन्‍नयनों के व्‍यापक संदर्भ में निम्‍न-आय की शहरी आबादी को सुविधा प्रदान करने के लिए कैसे अधिकाधिक प्रभावी रूप से लागू किया जा सकता है। केस अध्ययन निरूपक भारत के छोटे तथा मंझोले शहरों से संबद्ध थे: राजस्‍थान में कोटा तथा उत्‍तर प्रदेश में गाजियाबाद। यह अध्‍ययन दर्शाता है कि गाजियाबाद शहर की बेहतर संकल्‍पना की तुलना में कोटा शहर विफल रहता है। अंततः नीति-निर्धारण तथा ऐसे ही संदर्भ में एस/एस परियोजनाओं के उत्‍तरदायित्‍वों के संबंध में ऐसे अध्‍ययनों का निहितार्थ ऐसे मुख्‍य मुद्दे हैं जो इस अध्‍ययन के व्‍यापक उद्देश्‍यों का आधार हैं।

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