भारत में रेंटल हाउसिंगः एक सिंहावलोकन

Submitted by niuaadmin on 12 जनवरी 2016 - 4:43pm
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रेंटल हाउसिंग मुख्‍यतया एक शहरी कार्यकलाप है। शहरी क्षेत्रों में किराए के मकानों में रहने वाले परिवारों की संख्‍या ग्रामीण क्षेत्रों से कही ज्‍यादा है। इसके अतिरिक्‍त किराए के मकानों की प्रतिशतता छोटे-छोटे आकार के शहरों की तुलना में बड़े शहरों में कहीं ज्‍यादा है। वर्ष 1961-1981 के दौरान I श्रेणी के अधिकतर शहरों में रेंटल हाउसिंग की स्थिति की एकमात्र सर्वाधिक आम विशेषता रेंटल हाउसिंग में रहने वाले परिवारों की प्रतिशतता में गिरावट आना है। श्रेणी I के कुल 140 शहरों, जिनके संबंध में वर्ष 1961, 1971 तथा 1981 के लिए रेंटल हाउसिंग में रहने वाले परिवारों की प्रतिशतता संबंधी डाटा उपलब्‍ध है, में से केवल 28 शहरों ने ऐसे घरों के अनुपात में वृद्धि दर्शाई (80 प्रतिशत)। इस गिरावट के बावजूद रेंटल हाउसिंग शहरी भारत में कुल हाउसिंग का महत्‍वपूर्ण भाग बना हुआ है। शहरी क्षेत्रों में विशेषतौर पर निम्‍न तथा मध्‍यम आय – समूहों के लिए रेंटल हाउसिंग की आवश्‍यकता को ध्‍यान में रखते हुए इस अध्‍ययन में रेंटल हाउसिंग के संबंध में मौजूदा सरकारी नीतियों की समीक्षा की गई है।