शहरी विकास तथा शहरी सेवाओं का निजीकरणः सिडको का एक केस अध्‍ययन

Submitted by niuaadmin on 12 जनवरी 2016 - 4:47pm

भारत में शहरीकरण दो विपरीत विशेषताओं से अभिलक्षित होता है – आर्थिक कार्यकलापों में वृद्धि तथा जीवन की गुणवत्‍ता में गिरावट। शहरी क्षेत्रों में जीवन की गिरती हुई गुणवत्‍ता संबंधी कारणों में से एक कारण बढ़ती मांगों को पूरा करने के लिए अवसंरचना तथा सेवाओं के प्रावधान के प्रबंधन एवं संवर्धन में शहर की सरकारों की अक्षमता है। अब यह माना जा रहा है कि शहरी सेवा प्रदानगी ऐसी समस्‍या नहीं है जिसका समाधान केवल स्‍थानीय निकायों को अतिरिक्‍त वित्‍तीय संसाधन प्रदान करके ही किया जा सकता है। हाल ही में अवसंरचना, सेवाओं तथा आश्रय की शहरी सेवा प्रदानगी के संवर्धन एवं प्रबंधन के लिए सार्वजनिक तथा निजी क्षेत्रों के बीच भागीदारी व्‍यवस्‍थाओं के विभिन्‍न रूप शुरू किए गए हैं। अतः इस अध्‍ययन का मुख्‍य उद्देश्‍य अवसंरचना तथा सेवाओं के प्रबंधन में निजी क्षेत्र की भागीदारी में नवी मुम्‍बई में स्थित सिडको (महाराष्‍ट्र शहर तथा औद्योगिक विकास निगम लिमिटिड) के सफल अनुभवों को उजागर करना है।

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