मॉडलिंग रेंटल हाउसिंग मार्किटः एक संविदात्‍मक रूप-रेखा

Submitted by niuaadmin on 12 जनवरी 2016 - 4:36pm
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बड़े महानगरीय क्षेत्रों में रेंटल हाउसिंग एक मुख्‍य विशेषता है। ये क्षेत्र बड़ी संख्‍या में प्रवासियों, युवाओं तथा चलायमान आबादी द्वारा अभिलक्षित होते हैं। ये समूह शहरी क्षेत्र में रेंटल हाउसिंग की विविध प्रकार की मांग सृजित करते हैं। इस लेख में मांग और आपूर्ति को संचालित करने वाली ताकतों को समझने का प्रयास किया गया है क्‍योंकि वे रेंटल मार्किट पर प्रभाव डालती हैं। रेंटल मार्किट की मांग को अवधि के चयन के प्रश्‍न के रूप में देखा जाता है। अवधि के चयन के प्रश्‍न का निर्णय घरेलू स्‍तर पर लिया जाता है और यह विविध आर्थिक तथा गैर-आर्थिक पहलुओं द्वारा प्रभावित होता है। इस अध्‍ययन में प्रमुख विचारित चर दो प्रकार की अवधियों की तुलनात्‍मक लागत है। रियायत, कराधान, महंगाई तथा अनिश्चितता जैसे अन्‍य चरों द्वारा पड़ने वाले प्रभाव को घरों की लागत पर पड़ने वाले प्रभाव के रूप में देखा जा सकता है। घर की आय/संपदा तथा अवधि के चयन से संबंधित किराये नियंत्रण अधिनियम का प्रभाव को भी ध्‍यान में रखा गया है। महानगरीय क्षेत्र में रेंटल हाउसिंग की आपूर्ति में निजी तथा सार्वजनिक दोनों क्षेत्रों की आपूर्ति के घटक का विश्‍लेषण किया जाता है। रेंटल हाउसिंग की आपूर्ति पर किराया नियंत्रण अधिनियम तथा महंगाई संबंधी अपेक्षाओं से पड़ने वाले प्रभाव की भी चर्चा की गई है। रेंटल हाउसिंग मार्किट को स्‍थान, आवासीय प्रकार, आपूर्तिकर्त्‍ताओं के प्रकार तथा सरकारी नीतियों के अनुसार विभिन्‍न उप-मार्किटों में विभाजित किया जा सकता है। विभिन्‍न उप-मार्किटों में किराए के निर्धारण का विश्‍लेषण विभाजित रूप रेखा में किया जाता है।