नवीन संसाधन जुटाव प्रैक्टिस-तमिलनाडु में शहरी स्‍थानीय निकायों का मामला

Submitted by niuaadmin on 12 जनवरी 2016 - 4:12pm

भारत में शहरी स्‍थानीय निकाय (यूएलबी) मूल शहरी नागरिक सेवाओं के लिए आवर्ती व्‍यय तथा निवेशगत आवश्‍यकताओं की पूर्ति के लिए अपर्याप्‍त संसाधनों का दबाव झेलते हैं। तथापि, ये प्राधिकरण स्थानीय स्‍तरों पर अनेक सुधारों के जरिए अपने संसाधन आधार में वृद्धि करने के लिए समन्वित प्रयास कर रहे हैं। तमिलनाडु में अनेक यूएलबी प्रोद्भवन लेखाकरण प्रणाली को कार्यान्वित करके, संपत्ति करों के नियमित संशोधन को समर्थ बनाकर, सार्वजनिक-निजी भागीदारी को सुविधाजनक बनाकर, बेहतर संग्रहण क्षमताओं के लिए प्रोत्‍साहन राशि की पेशकश करके, विभिन्‍न म्‍युनिसिपल पहलुओं के संबंध में प्रशिक्षण आदि प्रदान करके स्‍थानीय स्‍तरों पर संसाधन जुटाने तथा क्षमता निर्माण में शीघ्रातिशीघ्र कदम उठा रहे हैं। यह अध्‍ययन लाभार्थी योगदान, संपत्ति कर दर संवर्धन, लागत में कमी, नए प्रयोक्‍ता प्रभार लगाने तथा अन्‍य प्रचलनों के जरिए सार्वजनिक सहभागिता पर आधारित तमिलनाडु के दस चुनिंदा शहरी स्‍थानीय निकायों के संबंध में नवीन संसाधन जुटाव प्रैक्टिसों तथा निष्‍कर्षों की मुख्‍य विशेषताएं उजागर करता है।

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