Research Studies

प्रकाशन तिथि: दिसंबर 2004

भारत में शहरी स्‍थानीय निकाय (यूएलबी) मूल शहरी नागरिक सेवाओं के लिए आवर्ती व्‍यय तथा निवेशगत आवश्‍यकताओं की पूर्ति के लिए अपर्याप्‍त संसाधनों का दबाव झेलते हैं। तथापि, ये प्राधिकरण स्थानीय स्‍तरों पर अनेक सुधारों के जरिए अपने संसाधन आधार में वृद्धि करने के लिए समन्वित प्रयास कर रहे हैं। तमिलनाडु में अनेक यूएलबी प्रोद्भवन लेखाकरण प्रणाली को कार्यान्वित करके, संपत्ति करों के नियमित संशोधन को समर्थ बनाकर, सार्वजनिक-निजी भागीदारी को सुविधाजनक बनाकर, बेहतर संग्रहण क्षमताओं के लिए प्रोत्‍साहन राशि की पेशकश करके, विभिन्‍न म्‍युनिसिपल पहलुओं के संबंध में प्रशिक्षण आदि प्रदान...

प्रकाशन तिथि: जून 2003

शहरी जनसंख्‍या में आई तेजी तथा शहरों के फैलाव से शहरी शिक्षा बुरी तरह प्रभावित हुई है। अतः मौजूदा अध्‍ययन राज्‍य की शहरी शिक्षा नीति के विश्‍लेषण के उद्देश्‍य के साथ शहरी क्षेत्रों में शिक्षा सेवा प्रदानगी की जटिलताओं को समझने हेतु एक प्रयास है। इसे पांच चुनिंदा शहरों में किया गया थाः जयपुर, हैदराबाद, लखनऊ, भिलाई तथा कटक। इन शहरों में चुनिंदा अ‍नधिकृत बस्तियों के बच्‍चों की निम्‍नलिखित मानदंड इस्‍तेमाल करके यादृच्छिक रूप से पहचान की गई थी- सरकारी स्‍कूल में जाने वाले बच्‍चे, निजी स्‍कूल में जाने वाले बच्‍चे, कामकाजी लड़कियां, काम न करने वाली तथा स्‍कूल न जाने वाली...

प्रकाशन तिथि: जुलाई 2008

शहरी गरीबों के लिए राष्‍ट्रीय कार्यनीति संबंधी जीओआई - यूएनडीपी परियोजना के अंतर्गत 11 शहरों के लिए शहरी गरीबी न्‍यूनीकरण कार्यनीतियां तैयार की गई हैं। इन ग्‍यारह शहरों में दो मेगा शहर (कोलकाता तथा चेन्‍नई), 4 मिलियन से अधिक आबादी वाले तीन शहर (अहमदाबाद, बेंगलुरू तथा हैदराबाद) और 1 मिलियन से अधिक आबादी वाले पांच शहर (लुधियाना, चंडीगढ़, जयपुर, पुणे, इंदौर) एवं अंबाला (वैकल्पिक परिपेक्ष्‍य के लिए एक गैर जेएनएनयूआरएम शहर) शामिल हैं। शहरी गरीबी न्‍यूनीकरण का मुख्‍य केन्‍द्रबिन्‍दु शहरी गरीबों के रहन-सहन में उन्‍नयन तथा उनकी जीवन गुणवत्‍ता का उन्‍नयन था। अतः यह अध्‍ययन ऐसी उप...

प्रकाशन तिथि: जुलाई 2008

जयपुर शहर के लिए राष्‍ट्रीय शहरी गरीब कार्यनीति के संबंध में भारत सरकार- यूएनडीपी के अंतर्गत शहरी गरीबी न्‍यूनीकरण कार्यनीति (यूपीआरएस) तैयार की गई है। यूपीआरएस का मुख्‍य फोकस शहरी लोगों के रहन-सहन तथा उनकी जीवन-गुणवत्‍ता में उन्‍नयन करना था। यह ऐसे उप-क्षेत्रीय कार्यनीतियों पर जोर देता है जो शहरी लोगों की आवश्‍यकताओं पर ध्‍यान देने के लिए संसाधनों का लाभ उठाने, यूपीआरएस में शहरी गरीबों की भागीदारी को बढ़ावा देने तथा गरीब-समर्थक संस्‍थागत सुधारों को बढ़ावा देने पर लक्षित है। यह कार्यनीति मूल अवसंरचना की सुलभता के विश्‍लेषण पर आधारित है तथा शहरी गरीबों के जीवन की उन्‍नत...

प्रकाशन तिथि: अप्रैल 2012

मलिन बस्‍ती के उन्‍नयन तथा सुधार को शहरी गरीबी उन्‍मूलन की कार्यनीति के रूप में अपनाया जाता है। यह अस्‍पष्‍ट है कि ऐसी कार्यनीति में निवेशों की उत्‍पादकता सफलता क्‍या होनी चाहिए, महत्‍वपूर्ण मामला यह बना हुआ है कि ऐसा निवेश केवल रियायत (सब्सिडी) मात्र था अथवा क्‍या इनसे कोई भौतिक सामाजिक एवम् आर्थिक लाभ मिले। इस संदर्भ में भोपाल शहर की दो मलिन बस्तियों का प्रायोगिक अध्‍ययन किया गया था – एक उन्‍नत एवं अद्यतन मलिन बस्‍ती थी जबकि दूसरी कोई भी उन्‍नयन रहित थी। इन दोनों मलिनबस्तियों में आर्थिक उत्‍पादकता पर प्रभाव डालने वाले इन्‍पुट मुख्‍यतया पानी, स्‍वच्‍छता तथा विद्युत की...

प्रकाशन तिथि: दिसंबर 2010

भारत में शहरी स्‍थानीय निकायों (यूएलबी) को केन्‍द्र सरकार तथा राज्‍य सरकारों से अनुदान मिल रहा है। ये केन्‍द्रीय तथा राज्‍य अनुदान मुख्‍यतया केन्‍द्रीय वित्‍त आयोग (सीएफसी) तथा राज्‍य वित्‍तीय आयोग (एसएफसी) की सिफारिशों पर आधारित होते हैं। अतः यह अध्‍ययन पांच चुनिंदा राज्‍यों तथा दस चुनिंदा यूएलबी में एसएफसी तथा सीएफसी द्वारा प्रस्‍तावित विविध हस्‍तांतरण पैकेजों तथा सहायता-अनुदान प्रणाली पर फोकस करता है। ये इस प्रकार हैं:- मध्‍य प्रदेश (भोपाल और उज्‍जैन), ओडिशा (भुवनेश्‍वर तथा पुरी), तमिलनाडु (चेन्‍नई, वेल्लौर तथा अलांडूर), गुजरात (अहमदाबाद तथा राजकोट), और असम (गुवाहाटी...

प्रकाशन तिथि: मार्च 2011

मौजूदा अध्‍ययन लेख में भारत के दस शहरों में चलाई गई अथवा चलाई जा रही दस शहरी परिवहन पहल/परियोजनाएं हैं। इसमें अहमदाबाद, पिम्‍परी-छिंदवाड़ा, विशाखापट्टनम, जयपुर की चार बस रेपिड ट्रांजिट प्रणाली (बीआरटीएस) परियोजनाएं; जालंधर, जबलपुर, सूरत, वडोदरा तथा जलगांव की पांच आधुनिक शहर बस सेवाएं; तथा कोलकाता की बहुस्‍तरीय भूमिगत पार्किंग परियोजना शामिल है। जयपुर पब्लिक ट्रांसपोर्ट (बीआरटी तथा आधुनिक शहर बस सेवा के जरिए) परियोजना के अलावा, शेष सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) आधारित परियोजनाएं हैं। प्रत्‍येक के लिए इस अध्‍ययन में इस पहल के कार्यान्‍वयन से पहले की स्थिति सहित परियोजना...

प्रकाशन तिथि: मार्च 2011

यह अध्‍ययन तेजी से बढ़ते हुए भारतीय शहरों में शहरी रूप तथा सतत विकास के बीच सह संबंध व्‍यक्‍त करता है। यह भारतीय शहरों में सतत शहरी रूप से संबंधित ज्ञान, नीतियों तथा प्रचलनों में अंतराल को पहचानने में सहायता करता है। इस प्रयोजनार्थ शहर तथा पड़ोसी स्‍तर पर राजकोट तथा फरीदाबाद का चयन एवं अध्‍ययन किया गया है। प्रत्‍येक स्‍तर पर लक्षण अत्‍यधिक भिन्‍न हैं। सामाजिक ढांचे, आर्थिक स्थिति, सेवा एवं अवसंरचना उपलब्‍धता, भू-उपयोग कॉन्‍फ्यूग्रेशन, संप्रेषण तथा परिवहन संबंधी सुविधाओं, जनांकीकिय रूझानों, शहर के आकृति विज्ञान तथा शहर के विस्‍तार के लिए ऐसे ही क्षेत्रों का अध्‍ययन शहर स्...

प्रकाशन तिथि: मार्च 1997

इस अध्‍ययन का प्राथमिक उद्देश्‍य भारत में शहरी अवसंरचना के वित्‍तपोषण का सिंहावलोकन करना है। इस विस्‍तृत अध्‍ययन के डिजाइन में उपलब्‍ध अध्‍ययनों की सामान-सूची तैयार करना, स्‍थानीय निकायों द्वारा शहरी वित्‍त के प्रतिनिधिक ब्‍यौरें तैयार करना, वित्‍त के नवीन संसाधनों का मूल्‍यांकन करना, वित्‍त के मौजूदा मुख्‍य स्रोतों के औचित्‍यकरण की सिफारिश करना, राज्‍यीय तथा अर्द्ध-राज्‍यीय निकायों की शहरी वित्‍तीय भूमिका का मूल्‍यांकन करना तथा बड़े एवं छोटे शहरी क्षेत्रों द्वारा संस्‍थागत वित्‍त का विभेदीकरण करना तथा अंततः निजी क्षेत्र की सीमा एवं आकार-प्रकार का मूल्‍यांकन करना शामिल...

प्रकाशन तिथि: जनवरी 1992

भारत में आवास में सार्वजनिक निवेश बहुत ही कम है। ऐसा अनुमान है कि ये कुल विकासमूलक निवेशों के 1.5 प्रतिशत से ज्‍यादा नहीं बैठते हैं। तथापि, सार्वजनिक संस्‍थागत क्षेत्र कुल आवास निवेशों का लगभग 20-25 प्रतिशत ही प्रदान करता है; बाकी 75-80 प्रतिशत निजी क्षेत्र द्वारा अर्थात हाउस होल्‍ड सेक्‍टर तथा अन्‍य गैर-औद्योगिक स्रोतों द्वारा प्रदान किया जाता है। इन सारे सकल अनुमानों से आवास वित्‍त बाजार के ढांचें, अपेक्षाकृत महत्‍व तथा विभिन्‍न स्रोतों के महत्‍व, आवासीय निवेशों के पर्याप्‍त अवसर और उन शर्तों एवं निबंधनों के बारे में देश में बहुत कम सूचना मिलती है जिन पर विभिन्‍न...

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