भारतीय शहरों के लिए शहरी हरित विकास कार्यनीतियां

 

जीजीजीआई की भारतीय शहरी कार्यक्रम के भाग के रूप में इस परियोजना का उद्देश्‍य शहरीकृत भारत के संदर्भ में ‘शहरी हरित विकास’ को परिभाषित करना, विविध भारतीय शहरों में हरित विकास संबंधी कार्य नीतियों की संभावनाओं तथा लाभों की सूचना देना एवं मात्रा बताना तथा राष्‍ट्रीय नीति वार्ता की सूचना देना, शहरी विकास मूलक आवश्‍यकताओं तथा भारतीय शहरों की चुनौतियों से संबद्ध उत्‍तम परिपाटियों का विस्‍तृत सेट का संकलन करना (हरियाली संबंधी प्रोद्योगिकीयां, नीतियां, कारोबारी मॉडल, मानक, प्रणाली, साझेदारी मॉडल आदि सहित) तथा यह बताना और यह अनुमान लगाना है कि भारतीय शहरों पर इन सर्वोत्‍तम परिपाटियों को कैसे लागू तथा वित्‍त पोषित किया जा सकता है (अपेक्षित निवेश, मानव संसाधन, नीतिगत ढ़ांचें, संस्‍थागत परिवर्तन, तकनीकी क्षमता आदि सहित) एवं भारतीय शहरों को इन सर्वोत्‍तम परिपाटियों से क्‍या फायदे मिल सकते हैं (आर्थिक वृद्धि, नौकरी सृजन, निवेशगत अवसर, गरीबी उपशमन आदि सहित)।

इस परियोजना के परिणामों से शहरी हरित विकास के लाभ की बेहतर समझ, अवसर तथा अपने स्‍वयं के आर्थिक एवं शहरी विकास की संभावना में मदद मिलेगी। इसके अतिरिक्‍त, अगले चरण में कार्यनीतिगत आयोजना, विश्‍लेषण, वित्‍तपोषण की उपलब्‍धता तथा हरित विकास हेतु वित्‍तपोषण में आंतरिक क्षमता निर्मित करने हेतु कुछएक शहरों को लिया जायेगा।

भारतीय शहरों के लिए शहरी हरित विकास संबंधी कार्यनीतियां – रिपोर्ट प्रकाशित!

नई दिल्‍ली, 27 फरवरी, 2015 – जैसा कि भारत सरकार ने संकल्‍पना की है भारतीय शहर में आर्थिक परिवर्तन हो रहे हैं। शहरों में प्रत्‍याशित वृद्धि को देखते हुए सरकारें ऐसी शहरी अवसंरचना तथा सेवाएं प्रदान करने में अत्‍यंत चुनौतियों का सामना कर रही हैं जो इनकी नागरिकों को बेहतर जीवन गुणवत्‍ता सुनिश्चित‍ करने के साथ-साथ उत्‍तरोत्‍तर सतत मांग के अनुरूप हों। इस संदर्भ में आर्थिक एवं सामाजिक उद्देश्‍यों को पर्यावरण लक्ष्‍यों से एकीकृत करने वाला हरित वृद्धि-दृष्टिकोण इस स्थिति से निपटने के लिए अत्‍यंत संबद्ध बन जाता है।

इसी पृष्‍ठभूमि की सकंल्‍पना से वर्ष 2013 में भारतीय शहरों के लिए हरित विकास कार्यनीतियों पर परियोजना शुरू की गई थी। यह परियोजना वैश्विक हरित वृद्धि संस्‍थान (जीजीजीआई) की सहायता एवं तकनीकी इन्पुट के साथ आईसीएलईआई- सततता हेतु स्‍थानीय सरकार-दक्षिण एशिया और राष्‍ट्रीय नगर कार्य संस्‍थान (रा.न.का.सं.) द्वारा शुरू की गई थी तथा 3 खंड वाली रिपोर्ट लांच करने के बाद इसे अब बंद कर दिया गया है:

खंड-1: भारतीय शहरों के लिए शहरों में हरियाली बढ़ाने हेतु कार्यनीति।

खंड-2: दस भारतीय शहरों की हरियाली बढ़ाने संबंधी रूप-रेखा।

खंड-3: हरियाली बढ़ाने संबंधी उत्‍तम परिपाटियां।

इस पहल में भारतीय शहरों के लिए हरियाली बढ़ाने संबंधी फ्रेमवर्क तैयार करना, इन्‍हें 10 भारतीय शहरों के लिए प्रायोगिक रूप से शुरू करना और भारतीय शहरी संदर्भ में 15 उत्‍तम परिपाटियों के सेट का संकलन करना शामिल है। इसमें भारतीय शहरों में वृद्धि की मौजूदा स्थिति का आकलन करना, उभरते हुए वृद्धिगत पैटर्नों तथा रूझानों को समझना और ऐसी कार्य नीतियां तैयार करना शामिल हैं जो कि आर्थिक वृद्धि प्राप्त करते हुए विविध विकास मूलक लाभ हासिल करने हेतु वृद्धि का मार्गदर्शन कर सके।

15 ये ज्‍यादा भारतीय शहरों ने इस पहल में भाग लिया जो बारह महीनों से ज्‍यादा चलीं तथा अपने शहर में हरियाली बढ़ाने के लिए अपनी उत्‍तम परिपाटियों, चुनौतियों तथा परिप्रेक्ष्‍यों के आदान-प्रदान में योगदान दिया।

चूंकि राष्‍ट्रीय सरकार ने स्‍मार्ट शहर, स्‍वच्‍छ भारत अभियान, शहरी नवीकरण मिशन तथा हृदय (धरोहर पुनरूद्धार एवं विकास) स्‍कीम जैसे नए कार्यक्रम शुरू किए, अत: ये रिपोर्टें लाभदायक इन्‍पुट प्रदान करती हैं ताकि शहर समावेशी हरित वृद्धि एजेंडा अपना सके।

इस रिपेार्ट की हार्ड कॉपी लेने के लिए कृपया पारोमिता दत्‍ता डे को Pdey@niuq.org पर लिखें।