भारत में सतत सामाजिक आवासीय पहल (सुशी)

विकासशील देशों में सामाजिक आवासीय कार्यक्रमों में सतत भवन परिपाटियों को प्रोत्‍साहन देने के लिए वर्ष 2009 में संयुक्‍त राष्‍ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) द्वारा सामाजिक आवासीय पहल (सुशी) शुरू की गई थी। इसका केन्‍द्र बिन्‍दु सतत भवन समाधानों का सामाजिक आवासीय कार्यक्रमों में एकीकरण करना है ताकि न केवल पर्यावरण, सामाजिक तथा आर्थिक लाभ प्राप्‍त किए जा सके अपितु संसाधन तथा ऊर्जा क्षमताओं के उन्‍नयन में भी सहायता प्रदान की जा सके तथा निम्‍न आय समूहों के लिए बेहतर रहन-सहन हेतु बढ़ावा दिया जा सके।

भारत में सुशी कार्यकलापों के एक भाग के रूप में यूएनईपी ने राष्‍ट्रीय नगर कार्य संस्‍थान (रा.न.का.सं.) को राष्‍ट्रीय और स्‍थनीय स्‍तरों पर मौजूदा नीतियों, प्रोत्‍साहनों, उपायों तथा बाधाओं की समीक्षा के आधार पर नीतिगत तथा वित्‍तीय मूल्‍यांकन करने का कार्य सौंपा है। इस अध्‍ययन का मुख्‍य उद्देश्‍य नीतिगत तथा वित्‍त पोषण मूल्‍यांकन तैयार करना था। दूसरा मौजूदा वित्‍त पोषण साधनों निजी तथा सार्वजनिक दोनों, की समीक्षा सहित सामाजिक आवास के लिए समाधान के विकल्‍पों पर उनके प्रभाव का मूल्यांकन करने के लिए उन साधनों पर था, जिन्‍हें सतत समाधानों के लिए निवेशगत लागतों पर ध्‍यान देने हेतु तथा राष्‍ट्रीय परिदृश्‍य के अनुरूप वित्‍तीय तथा नीतिगत साधन तैयार करने के लिए अवसर तलाशने तथा सिफारिशों का प्रस्‍ताव रखने के लिए अपनाया जा सकता था ताकि राष्‍ट्रीय, सामाजिक-आर्थिक तथा राजनैतिक संदर्भ के अनुरूप सतत सामाजिक आवासीय योजना को सहायता प्रदान की जा सके।